स्वराज की अवधारणा: शंका एवं समाधान

ठाकुरदास बंग गाँधीजी ने स्वराज के वर्षो पूर्व 1909 में ही हिन्द स्वराज जैसी छोटी-सी किताब लिखकर अपनी कल्पना के स्वराज का चित्र खींचा था। स्वराज प्राप्ति के लिए उन्होंने नैतिक साध्नों का इस्तेमाल का व्यापक आंदोलन किया। लेकिन गाँधीजी के हत्या से यह संभव नहीं हो पाया। पाश्चात्य लोकतांत्रिक देशों में चुनाव के साथ-साथ [...]

स्वराज का मेरे लिए क्या अर्थ है

…. मुझे भारत को केवल अंग्रेजों की पराधीनता से ही मुक्त कराने में दिलचस्पी नहीं है। मैं भारत को सभी प्रकार की पराधीनताओं से मुक्त कराने के लिए कटिबद्ध हूं। मुझे एक शासक के स्थान पर दूसरे शासक को लाने की जरा भी इच्छा नहीं है। (हरिजन, 18 अप्रैल 1936) …. सच्चा स्वराज मुट्ठी भर [...]

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 74 other followers